संतो पांडे निपुण कसाई। बकरा मारि भैंसा पर धावै , दिल मँह दर्द न आई।। करि अस्नान तिलक दै बैठे , विधि से देवि पुजाई। आतम राम पलक में बिनसे , ...

कलि के विदूषक

कलि के विदूषक

कलि के विदूषक

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संतो पांडे निपुण कसाई।
बकरा मारि भैंसा पर धावै, दिल मँह दर्द न आई।।
करि अस्नान तिलक दै बैठे, विधि से देवि पुजाई।
आतम राम पलक में बिनसे, रूधिर की नदी बहाई।।
अति पुनीत ऊँचे कुल कहिये, सभा माँहि अधिकाई।
इनते दीक्षा सब कोई मांगै, हाँसि आवै मोहि भाई।।
पाप कटन को कथा सुनावै, कर्म करावै नीचा।
हम तो दोउ परस्पर देखा, गहे हाथ यम खींचा।।
गाय बंधे ते तूरूक कहिये, इनते वै क्या छोटे।
कहँहि कबीर सुनो भाई संतो, कलि मँह ब्राह्मण खोटे।।

1 comment

  1. Mere vichar se jiske dil me daya nahi, wo insan nahi. Aur jo mansahari ho, jeev hatya kar k apni jihwa ko santusht karta ho, usme nishit rup se daya to bilkul nahi hoga. Ye dusro ko kya path parhayenge?

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